
पंचकोश (Panchkosha) भारतीय दर्शन, खासकर तैत्तिरीय उपनिषद (Taittiriya Upanishad) में वर्णित मानव अस्तित्व की पाँच परतें या आवरण हैं, जो स्थूल शरीर से लेकर परम आनंद तक की यात्रा को दर्शाते हैं: अन्नमय कोश (भौतिक शरीर), प्राणमय कोश (ऊर्जा), मनोमय कोश (मन/भावना), विज्ञानमय कोश (बुद्धि), और आनंदमय कोश (परम आनंद)।
अन्नमय कोश (Annamaya Kosha) योग और वेदांत दर्शन के अनुसार आत्मा को ढकने वाली पाँच कोशों (परतों) में से पहली और सबसे बाहरी परत है, जो हमारे भौतिक शरीर को दर्शाती है, जो अन्न (भोजन) से बनता है, बढ़ता है और अंततः उसी में विलीन हो जाता है, जिसे स्वस्थ रखना, सही भोजन और व्यायाम से पोषित करना आध्यात्मिक प्रगति के लिए ज़रूरी है, क्योंकि यह अन्य कोशों का आधार है।
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